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" वर्ण परिवर्तन के कुछ उदाहरण "

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वेदों के बारे में फैलाई गई भ्रांतियों में से एक यह भी है कि वे ब्राह्मणवादी ग्रंथ हैं और शूद्रों के साथ अन्याय करते हैं | हिन्दू/सनातन/वैदिक धर्म का मुखौटा बने जातिवाद की जड़ भी वेदों में बताई जा रही है और इन्हीं विषैले विचारों पर दलित आन्दोलन इस देश में चलाया जा रहा है | परंतु, इस से बड़ा असत्य और कोई नहीं है | इस श्रृंखला में हम इस मिथ्या मान्यता को खंडित करते हुए, वेद तथा संबंधित अन्य ग्रंथों से स्थापित करेंगे कि – १.चारों वर्णों का और विशेषतया शूद्र का वह अर्थ है ही नहीं, जो मैकाले के मानसपुत्र दुष्प्रचारित करते रहते हैं | २.वैदिक जीवन पद्धति सब मानवों को समान अवसर प्रदान करती है तथा जन्म- आधारित भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं रखती | ३.वेद ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो सर्वोच्च गुणवत्ता स्थापित करने के साथ ही सभी के लिए समान अवसरों की बात कहता हो | जिसके बारे में आज के मानवतावादी तो सोच भी नहीं सकते | आइए, सबसे पहले कुछ उपासना मंत्रों से जानें कि वेद शूद्र के बारे में क्या कहते हैं  – यजुर्वेद १८ | ४८ हे भगवन!  हमारे ब्राह्मणों में, क्षत्रियों में, वैश्यों में तथा शूद...

How Communist, Lefist & Islamic terror ideology destorying a Our Hindu culture of Sabarimala Temple !

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How Communist, Lefist, Christian missionary & Islamic terror ideology destorying a Our Hindu culture of Sabarimala Temple ! List of *All Women* who attempted to enter Sabarimala temple: 1. Libi - Xtian, Atheist 2. Suhasini Raj - Atheist, Hindu hater, NYT journalist 3. Kavitha Jakkal - Xtian 4. Rehana Fatima – Muslim who carried stained Sanitary Napkin along with coconut to offer “Ayyappa” 5. Mary Sweety - Xtian  Direct questions to some of my intellectual friends: 1)      Should we let 5 non-Hindu activists decide the future of 10,000+ year old Hindu dharma? Come… on my friends! 2)      Are they devotees? Are they well-wishers? 3)      Are they asking equalities for our moms, sisters, or daughters? Do they really care? 4)      Why are they not fighting to reform their own religions? Why don’t they fight for cruel girl genital mutilations? 5)      What is their motive? M...

Sikh is a Hindu Kshatriya warrior's ( Hindu is a Sikh & Sikh is a Hindu)

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What do Sikh people think about Hindus?      Answered by Jasbeer Singh                 I being a Sikh think of Hindus as one of the most tolerant people who are receptive to other ideologies. They were our ancestors, they ‘are’ our blood brothers, we share same surname with many Hindus (Singh), they strive for the same goal (in spiritual terms). They treat us as their own, yet they never pretend to own us because they always respect our separate identity. We have always lived side by side shoulder to shoulder in all our good & bad times like caring sharing friends. Above all India lives in our hearts. They were our ancestors  for sure because my ancestors may or may not be Muslims before Sikhi started, they may or may not be Buddhists/Jains at the beginning of this millennium but they were one hundred percent Hindus before choosing any another Spiritual Path for themselves that’s for sure. They are our blo...

" एक शासक का पहला कर्त्यव अपने राज्य का गौरव और सम्मान बचाने का होता है।"

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मुगल काल में पैदा हुआ वो बालक कहलाया राणा होते जौहर चित्तौड़ दुर्ग फिर बरसा मेघ बन के राणा हरमों में जाती थीं ललना बना कृष्ण द्रौपदी का राणा रौंदी भूमि ज्यों कंस मुग़ल बना कंस को अरिसूदन राणा छोड़ा था साथियों ने भी साथ चल पड़ा युद्ध इकला राणा चेतक का पग हाथी मस्तक ज्यों नभ से कूद पड़ा राणा मानसिंह भयभीत हुआ जब भाला फैंक दिया राणा देखी शक्ति तप वीर व्रती हाथी भी कांप गया राणा चहुँ ओर रहे रिपु घेर देख सोचा बलिदान करूँ राणा शत्रु को मृगों का झुण्ड जान सिंहों सा टूट पड़ा राणा देखा झाला यह दृश्य कहा अब सूर्यास्त होने को है सब ओर अँधेरा बरस रहा लो डूबा आर्य भानु राणा गरजा झाला के भी होते रिपु कैसे छुएगा तन राणा ले लिया छत्र अपने सिर पर अविलम्ब निकल जाओ राणा  हुंकार भरी शत्रु को यह मैं हूँ राणा मैं हूँ राणा  नृप भेज सुरक्षित बाहर खुद बलि दे दी कह जय हो राणा कह नमस्कार भारत भूमि रक्षित करना रक्षक राणा! 🕉⛳💐🌹🙏 Santoshkumar B Pandey at 9.40pm.

डॉ. बाबासाहब अंबेडकर के दलित आन्दोलन में बाह्मणो का योगदान !

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डॉ. बाबासाहब अंबेडकर के दलित आन्दोलन में बाह्मणो का योगदान लेखक-डॉ. पी. जी. ज्योतिकर अनुवाद : जयंतिभाई पटेल कुछ समय से दलित समाज में क्रांतिकारी नेता के विषय में एक मापदण्ड देखा जाता है. अनुभव किया जा रहा है, दलित समाज की सभाओं में जो ब्राह्मणों को वीभत्स गालियाँ, हिन्दू देवी-देवताओं का मज़ाक एवं महात्मा गाँधी जी का मजाक अपने भाषणों में जो करता है, वह वक्ता-नेता महान् क्रांतिकारी, उद्दामवादी प्रगतिशील माना जाए !! सभाओं में तालियाँ, और यह सब हो रहा है पू. बोधिसत्व डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जी के नाम पर..कुछ हमारे मित्र जन तो दलितस्तान भी बाबासाहब जैसे देशभक्त के खाते में जमा कराने का अपराधजन्य कुकृत्य भी कर रहे हैं। आइए आज हम बाबासाहब के जीवन की कुछ हकीकतें जानें और गंभीरता से उसके बारे में सोचें। 1. वर्षा से भीगे हुए छोटे से भीम को अपना रूढ़िचुस्त ब्राह्मणत्व भूल कर अपने घर ले जाकर ब्राह्मण पत्नी द्वारा गरम पानी से अपने पुत्र के साथ स्नान कराने वाले शिक्षक पेंडशे गुरुजी का अपने 50वें जन्मदिन पर बोधिसत्व डॉ. बाबा साहब स्मरण करते हुए कहते हैं- 'स्कूल जीवन का यह मेरा पहला सुख था।...

🕉️ Brahma blessed a Bhagwan Buddha 💕💟🙏

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" Bhagwan Buddha follow path of Veda like yoga , meditation ,  Seva , Science & Technology ." " Brahma offers flowers; the god Brahma came to the Buddha with an offering of flowers and asked the Buddha to teach the Dharma for the sake of all beings, out of compassion and wisdom, so that all sentient being might benefit from his profound enlightenment." 🕉🌹🌷⛳🌹🌷🙏 Santoshkumar B Pandey at 7.40Am.

मानव समाज में परिवार एक महत्वपूर्ण बुनियादी इकाई है।

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मानव समाज में परिवार एक महत्वपूर्ण बुनियादी इकाई है। जिसके बगैर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। मनुष्य को अपने विकास के लिए समाज की आवश्यकता हुयी, इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाज की प्रथम इकाई के रूप में परिवार का उदय हुआ। परंतु वर्तमान आधुनिक समाज में परिवार नाम की यह इकाई बिखरती चली जा रही है। संयुक्त परिवार जो भारतीय समाज की रीढ़ हुआ करती थी अब एकल परिवारों में तब्दील होते जा रहे हैं। इस बिखराव को ही देखते हुए ही संभवत: संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस परिवारों से जुड़े मसलों के प्रति लोगों को जागरूक करने और परिवारों को प्रभावित करने वाले आर्थिक,सामाजिक दृष्टिकोणों के प्रति ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस तरह1995 से यह सिलसिला जारी है। प्रति वर्ष इस दिन को मनाने के लिए अलग-अलग विषय भी निर्धारित किया जाता है। 2013 के वर्ष को 'सामाजिक एकता और अंत: पीढ़ीगत एकजुट...