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Sikh is a Hindu Kshatriya warrior's ( Hindu is a Sikh & Sikh is a Hindu)

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What do Sikh people think about Hindus?      Answered by Jasbeer Singh                 I being a Sikh think of Hindus as one of the most tolerant people who are receptive to other ideologies. They were our ancestors, they ‘are’ our blood brothers, we share same surname with many Hindus (Singh), they strive for the same goal (in spiritual terms). They treat us as their own, yet they never pretend to own us because they always respect our separate identity. We have always lived side by side shoulder to shoulder in all our good & bad times like caring sharing friends. Above all India lives in our hearts. They were our ancestors  for sure because my ancestors may or may not be Muslims before Sikhi started, they may or may not be Buddhists/Jains at the beginning of this millennium but they were one hundred percent Hindus before choosing any another Spiritual Path for themselves that’s for sure. They are our blo...

" एक शासक का पहला कर्त्यव अपने राज्य का गौरव और सम्मान बचाने का होता है।"

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मुगल काल में पैदा हुआ वो बालक कहलाया राणा होते जौहर चित्तौड़ दुर्ग फिर बरसा मेघ बन के राणा हरमों में जाती थीं ललना बना कृष्ण द्रौपदी का राणा रौंदी भूमि ज्यों कंस मुग़ल बना कंस को अरिसूदन राणा छोड़ा था साथियों ने भी साथ चल पड़ा युद्ध इकला राणा चेतक का पग हाथी मस्तक ज्यों नभ से कूद पड़ा राणा मानसिंह भयभीत हुआ जब भाला फैंक दिया राणा देखी शक्ति तप वीर व्रती हाथी भी कांप गया राणा चहुँ ओर रहे रिपु घेर देख सोचा बलिदान करूँ राणा शत्रु को मृगों का झुण्ड जान सिंहों सा टूट पड़ा राणा देखा झाला यह दृश्य कहा अब सूर्यास्त होने को है सब ओर अँधेरा बरस रहा लो डूबा आर्य भानु राणा गरजा झाला के भी होते रिपु कैसे छुएगा तन राणा ले लिया छत्र अपने सिर पर अविलम्ब निकल जाओ राणा  हुंकार भरी शत्रु को यह मैं हूँ राणा मैं हूँ राणा  नृप भेज सुरक्षित बाहर खुद बलि दे दी कह जय हो राणा कह नमस्कार भारत भूमि रक्षित करना रक्षक राणा! 🕉⛳💐🌹🙏 Santoshkumar B Pandey at 9.40pm.

डॉ. बाबासाहब अंबेडकर के दलित आन्दोलन में बाह्मणो का योगदान !

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डॉ. बाबासाहब अंबेडकर के दलित आन्दोलन में बाह्मणो का योगदान लेखक-डॉ. पी. जी. ज्योतिकर अनुवाद : जयंतिभाई पटेल कुछ समय से दलित समाज में क्रांतिकारी नेता के विषय में एक मापदण्ड देखा जाता है. अनुभव किया जा रहा है, दलित समाज की सभाओं में जो ब्राह्मणों को वीभत्स गालियाँ, हिन्दू देवी-देवताओं का मज़ाक एवं महात्मा गाँधी जी का मजाक अपने भाषणों में जो करता है, वह वक्ता-नेता महान् क्रांतिकारी, उद्दामवादी प्रगतिशील माना जाए !! सभाओं में तालियाँ, और यह सब हो रहा है पू. बोधिसत्व डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जी के नाम पर..कुछ हमारे मित्र जन तो दलितस्तान भी बाबासाहब जैसे देशभक्त के खाते में जमा कराने का अपराधजन्य कुकृत्य भी कर रहे हैं। आइए आज हम बाबासाहब के जीवन की कुछ हकीकतें जानें और गंभीरता से उसके बारे में सोचें। 1. वर्षा से भीगे हुए छोटे से भीम को अपना रूढ़िचुस्त ब्राह्मणत्व भूल कर अपने घर ले जाकर ब्राह्मण पत्नी द्वारा गरम पानी से अपने पुत्र के साथ स्नान कराने वाले शिक्षक पेंडशे गुरुजी का अपने 50वें जन्मदिन पर बोधिसत्व डॉ. बाबा साहब स्मरण करते हुए कहते हैं- 'स्कूल जीवन का यह मेरा पहला सुख था।...

🕉️ Brahma blessed a Bhagwan Buddha 💕💟🙏

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" Bhagwan Buddha follow path of Veda like yoga , meditation ,  Seva , Science & Technology ." " Brahma offers flowers; the god Brahma came to the Buddha with an offering of flowers and asked the Buddha to teach the Dharma for the sake of all beings, out of compassion and wisdom, so that all sentient being might benefit from his profound enlightenment." 🕉🌹🌷⛳🌹🌷🙏 Santoshkumar B Pandey at 7.40Am.

मानव समाज में परिवार एक महत्वपूर्ण बुनियादी इकाई है।

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मानव समाज में परिवार एक महत्वपूर्ण बुनियादी इकाई है। जिसके बगैर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। मनुष्य को अपने विकास के लिए समाज की आवश्यकता हुयी, इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए समाज की प्रथम इकाई के रूप में परिवार का उदय हुआ। परंतु वर्तमान आधुनिक समाज में परिवार नाम की यह इकाई बिखरती चली जा रही है। संयुक्त परिवार जो भारतीय समाज की रीढ़ हुआ करती थी अब एकल परिवारों में तब्दील होते जा रहे हैं। इस बिखराव को ही देखते हुए ही संभवत: संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस परिवारों से जुड़े मसलों के प्रति लोगों को जागरूक करने और परिवारों को प्रभावित करने वाले आर्थिक,सामाजिक दृष्टिकोणों के प्रति ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इस तरह1995 से यह सिलसिला जारी है। प्रति वर्ष इस दिन को मनाने के लिए अलग-अलग विषय भी निर्धारित किया जाता है। 2013 के वर्ष को 'सामाजिक एकता और अंत: पीढ़ीगत एकजुट...

Sanghe Shaktih Kalow Yuge 🕉⛳🌷🌹🙏

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Sanghe Shaktih Kalow Yuge Dharma Sanaatana preaching unity But can Hindus show solidarity World family - A noble goal But first we must unite the Hindu fold First we must unite the Hindu world The Shaastris clearly say, in Kaliyuga day - Sanghe shaktih kalow yuge Haath jor kar we greet the world - Shaanti pravachan has been our soul Vasudhaiva Kutumbakam our goal - Nishkaam poojaari has been our role Yet, remember Shri Rama couldn’t cross to Lanka Not until he showed power In Kaliyua plight, right needs might Sanghe shaktih Kalow yuge Dharma will protect us the Rishis say - if we protect our Dharma today The birthright of every Hindu - Is Vedas, Gita and Raamayan too We are own friend, we eur enemy Unity will change our destiny Embrace every part, ignite every spark Sanghe shaktíh kalow yuge The work doesn’t start with the outside world - lt all starts in the Hindu fold Raavan was Hindu, Yudhishtir too - Mantharaa Hindu, Kowshalyaa too The building of commun...

सब हिंदू भारत माता की संतान होने से सहोदर है | इसलिए कोई हिंदू पतित नहीं हो सकता है | हमने "समानता" का मंत्र लेकर "धर्मरक्षा" की दीक्षा ली है ||

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हिन्दव:सोदरा: सर्वे, न हिन्दू: पतितो भवेत्। मम दीक्षा हिन्दू रक्षा, मम मंत्र: समानता। Hindavaha Sodaraha Sarvey Na Hindu Patito Bhavet Mama Deeksha Hindu Raksha Mama Mantra Samaanata (All Hindus are brothers No Hindu is inferior My duty is to protect Hindus Equality is my motto)” मैं हिन्दू हूँ और मेरे समाज में आज भी कोई बच्चा पैदा होता है तो उसके मुँह में सबसे पहले चमाइन की उँगली जाती है । फिर भी क्या छूत-अछूत मानने का औचित्य बनता है ? बिना डोम-ब्राह्मण के हमारा शादी-विवाह और अंतिम संस्कार पूरा नहीं होता फिर भी हिन्दू समाज में छूत-अछूत है ? अरे मुर्ख पापियों….. हमारा सनातन संस्कृति एक सुव्यवस्थित समाज का उदाहरण था । जहाँ जातिवाद नहीं भाईचारा था सभी भाई का अपना अलग रोजगार अलग कार्य था कोई हस्तक्षेप नहीं था बस सहयोग था । माली के हाथ के फूल को भगवान पर अर्पित करना क्या जातिवाद है ???? नाई-ब्राह्मण को अपने सारे शुभ महोत्सव में हिस्सा बनाना क्या जातिवाद है ??? कंटक-ब्राह्मण के बिना श्राद्ध-भोज को अपूर्ण समझना जातिवाद है ????? कुम्हार के बनाए बर्तन में अहीर के यहाँ से दूध लाकर दह...